श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 69: राजा पृथुका चरित्र  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.69.27 
एवं निकायैस्तैर्दुग्धा पयोऽभीष्टं हि सा विराट्।
यैर्वर्तयन्ति ते ह्यद्य पात्रैर्वत्सैश्च नित्यश:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार समस्त प्राणियों ने बछड़ों और पात्रों की कल्पना करके पृथ्वी से अपनी इच्छानुसार दूध दुहा था, जिससे वे आज तक अपना पालन कर रहे हैं॥ 27॥
 
In this way all living beings, by imagining calves and vessels, had milked the milk they desired from the earth, by which they have been sustaining themselves even today.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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