श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 69: राजा पृथुका चरित्र  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.69.25 
पुण्यगन्धान् पद्मपात्रे गन्धर्वाप्सरसोऽदुहन्।
वत्सश्चित्ररथस्तेषां दोग्धा विश्वरुचि: प्रभु:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
गन्धर्वों और अप्सराओं ने कमल के पात्र में दूधरूपी पवित्र गंध का पान किया। उनका बछड़ा चित्ररथ था और दूध दुहने वाला गन्धर्वराज विश्वरुचि था ॥25॥
 
The Gandharvas and Apsaras milked the sacred smell in the form of milk in the lotus vessel. His calf was Chitraratha and the milker was Gandharvaraj Vishvaruchi. 25॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd