Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.69.17-18h: उस समय, गाय रूपी धरती ममता से भरकर बछड़े, दूध दुहने वाले और दूध के घड़े की कामना करती हुई खड़ी हो गई। पौधों के बीच खिलता हुआ साल का पेड़ बछड़ा बन गया। पाकर का पेड़ दूध दुहने वाला बन गया। अंजीर का पेड़ एक सुंदर दूध के घड़े के रूप में कार्य करने लगा। यह दूध ही था जो कटने के बाद फिर से उग आया। | mahabharat अध्याय 7.69: राजा पृथुका चरित्र । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय, गाय रूपी धरती ममता से भरकर बछड़े, दूध दुहने वाले और दूध के घड़े की कामना करती हुई खड़ी हो गई। पौधों के बीच खिलता हुआ साल का पेड़ बछड़ा बन गया। पाकर का पेड़ दूध दुहने वाला बन गया। अंजीर का पेड़ एक सुंदर दूध के घड़े के रूप में कार्य करने लगा। यह दूध ही था जो कटने के बाद फिर से उग आया।
At that time, the earth in the form of a cow became full of motherly affection and stood there wishing for a calf, a milker and a milk pot. The sal tree blooming among the plants became the calf. The Pakar tree became the milker. The fig tree started functioning as a beautiful milk pot. This milk was the one that grew again after being cut.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥