श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 69: राजा पृथुका चरित्र  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.69.14 
एह्येहि वसुधे क्षिप्रं क्षरैभ्य: काङ्क्षितं पय:।
ततो दास्यामि भद्रं ते अन्नं यस्य यथेप्सितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वसुधा! तुम्हारा कल्याण हो। आओ, आओ, शीघ्र ही इन प्रजा के लिए इच्छित दूध की धारा बहाओ। तब मैं मनुष्य को उसकी इच्छानुसार भोजन दे सकूँगा।॥14॥
 
Vasudha! May you be blessed. Come, come, quickly pour the desired stream of milk for these subjects. Then I will be able to give the food to the person as per his desire.'॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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