श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 69: राजा पृथुका चरित्र  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.69.13 
तथेत्युक्त्वा पृथुर्वैन्यो गृहीत्वाऽऽजगवं धनु:।
शरांश्चाप्रतिमान् घोरांश्चिन्तयित्वाब्रवीन्महीम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
बहुत अच्छा' ऐसा ही होगा, ऐसा कहकर वेणकुमार पृथु ने अपना आजगव धनुष और अपने अतुलनीय मारक बाण हाथ में ले लिए और कुछ देर विचार करके पृथ्वी से कहा -॥13॥
 
Very good' it will be so, saying this Venkumar Prithu took in his hand his Aajagav bow and his deadly arrows which had no comparison and after thinking for a while said to Prithvi -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)