श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 69: राजा पृथुका चरित्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.69.1 
नारद उवाच
पृथुं वैन्यं च राजानं मृतं सृञ्जय शुश्रुम।
यमभ्यषिञ्चन् साम्राज्ये राजसूये महर्षय:॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारद जी कहते हैं- संजय! हमने सुना है कि वेन के पुत्र राजा पृथु भी जीवित नहीं रह सके थे। महर्षियों ने राजसूय यज्ञ में उन्हें सम्राट पद पर अभिषिक्त किया था।
 
Narada ji says- Sanjaya! We have heard that Ven's son King Prithu also could not survive. The great sages had anointed him as the emperor in the Rajasuya Yajna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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