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mahabharat 7.67.14-15h: जिस रात्रि को संकृति के पुत्र रन्तिदेव के घर अतिथियों का समूह रहता था, उस रात्रि को इक्कीस हजार गौएँ छूकर दान में दी जाती थीं ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.67: राजा रन्तिदेवकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 67: राजा रन्तिदेवकी महत्ता  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.67.14-15h 
सांकृते रन्तिदेवस्य यां रात्रिमतिथिर्वसेत्॥ १४॥
आलभ्यन्त तदा गाव: सहस्राण्येकविंशति:।
 
 
अनुवाद
जिस रात्रि को संकृति के पुत्र रन्तिदेव के घर अतिथियों का समूह रहता था, उस रात्रि को इक्कीस हजार गौएँ छूकर दान में दी जाती थीं ॥14 1/2॥
 
On the night when a group of guests used to stay at the house of Rantidev, son of Sankriti, twenty-one thousand cows were touched and given in charity. ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)