श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 67: राजा रन्तिदेवकी महत्ता  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.67.13 
नैतादृशं दृष्टपूर्वं कुबेरसदनेष्वपि।
धनं च पूर्यमाणं न: किं पुनर्मनुजेष्विति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हमने तो कुबेर के महल में भी इतना बड़ा खजाना (रंतिदेव के समान) नहीं देखा; फिर वह मनुष्यों में कैसे मिल सकता है?
 
We have never seen such a huge treasure (like that of Rantidev) even in the palace of Kubera; then how can it be found among human beings?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)