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mahabharat 7.67.10-11: वे ऋषियों को करवे, घड़े, बर्तन, पत्थर, पलंग, आसन, सवारी, महल और घर, नाना प्रकार के वृक्ष और अन्न देते थे। बुद्धिमान रन्तिदेव को दी गई सभी वस्तुएँ सोने की बनी हुई थीं। 10-11॥   |   mahabharat अध्याय 7.67: राजा रन्तिदेवकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 67: राजा रन्तिदेवकी महत्ता  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  7.67.10-11 
ऋषिभ्य: करकान् कुम्भान् स्थाली: पिठरमेव च।
शयनासनयानानि प्रासादांश्च गृहाणि च॥ १०॥
वृक्षांश्च विविधान् दद्यादन्नानि च धनानि च।
सर्वं सौवर्णमेवासीद् रन्तिदेवस्य धीमत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे ऋषियों को करवे, घड़े, बर्तन, पत्थर, पलंग, आसन, सवारी, महल और घर, नाना प्रकार के वृक्ष और अन्न देते थे। बुद्धिमान रन्तिदेव को दी गई सभी वस्तुएँ सोने की बनी हुई थीं। 10-11॥
 
They used to give karvas, pitchers, pots, stones, beds, seats, rides, palaces and houses, various types of trees and food grains to the sages. All the things given to the wise Rantidev were made of gold. 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)