श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 65: राजा शशबिन्दुका चरित्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.65.1 
नारद उवाच
शशबिन्दुं च राजानं मृतं सृञ्जय शुश्रुम।
ईजे स विविधैर्यज्ञै: श्रीमान् सत्यपराक्रम:॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं- संजय! मैंने सुना है कि राजा शशबिन्दु की भी मृत्यु हो गई थी। उस वीर और सत्यवादी राजा ने अनेक प्रकार के यज्ञ किए थे।
 
Naradji says- Sanjaya! I have heard that King Shashabindu had also died. That valiant and truthful king had performed various types of Yajnas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)