Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.63.10: इस प्रकार, यशस्वी राजा ययाति ने धैर्य का आश्रय लेकर तथा समस्त कामनाओं का त्याग करके अपने पुत्र पुरु को राजसिंहासन पर बिठाया और वन को चले गये।   |   mahabharat अध्याय 7.63: राजा ययातिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 63: राजा ययातिका उपाख्यान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.63.10 
एवं कामान् परित्यज्य ययातिर्धृतिमेत्य च।
पूरुं राज्ये प्रतिष्ठाप्य प्रयातो वनमीश्वर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, यशस्वी राजा ययाति ने धैर्य का आश्रय लेकर तथा समस्त कामनाओं का त्याग करके अपने पुत्र पुरु को राजसिंहासन पर बिठाया और वन को चले गये।
 
Thus, the prosperous King Yayati, having taken refuge in patience and abandoning all desires, placed his son Puru on the throne and departed for the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)