श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 62: राजा मान्धाताकी महत्ता  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  7.62.7-8 
ततस्तु धारां पयसो घृतस्य च महात्मन:॥ ७॥
तस्यास्ये यौवनाश्वस्य पाणिरिन्द्रस्य चास्रवत्।
अपिबत् पाणिमिन्द्रस्य स चाप्यह्नाभ्यवर्धत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् इन्द्र के हाथ से दूध और घी की धारा महामान्धाता के मुख में प्रवाहित हुई। बालक इन्द्र के हाथ से दूध पीने लगा और एक ही दिन में बहुत बड़ा हो गया।
 
Thereafter Indra's hand poured a stream of milk and ghee into the mouth of the great Mandhaata. The child started drinking from Indra's hand and grew very big in a single day. 7-8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)