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mahabharat 7.62.6-7h: तत्पश्चात् इन्द्र की अँगुलियों से अमृतमय दूध प्रकट हुआ; क्योंकि इन्द्र ने दया करके उसे ‘माँ धाश्यति’ (मेरा दूध पियोगे) कहकर आशीर्वाद दिया था, इसलिए उसका अद्भुत नाम ‘मान्धाता’ रखा गया ॥6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.62: राजा मान्धाताकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 62: राजा मान्धाताकी महत्ता  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  7.62.6-7h 
ततोऽङ्गुलिभ्यो हीन्द्रस्य प्रादुरासीत् पयोऽमृतम्।
मां धास्यतीति कारुण्याद् यदिन्द्रो ह्यन्वकम्पयत्॥ ६॥
तस्मात्तु मान्धातेत्येवं नाम तस्याद्भुतं कृतम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् इन्द्र की अँगुलियों से अमृतमय दूध प्रकट हुआ; क्योंकि इन्द्र ने दया करके उसे ‘माँ धाश्यति’ (मेरा दूध पियोगे) कहकर आशीर्वाद दिया था, इसलिए उसका अद्भुत नाम ‘मान्धाता’ रखा गया ॥6 1/2॥
 
Thereafter, nectar-filled milk appeared from Indra's fingers; Because Indra out of compassion had blessed him by saying ‘Maa Dhasyati’ (will drink my milk), hence his wonderful name ‘Mandhata’ was fixed. 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)