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mahabharat 7.62.3-4h: दूर से धुआँ उठता देख, वे उसी दिशा में चले और एक यज्ञ-वेदी पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने घी मिश्रित जल पिया और एक पात्र में रखे मंत्रों का जाप किया। उस जल को युवनाश्व के गर्भ में पुत्र के रूप में परिवर्तित होते देख, श्रेष्ठ वैद्य अश्विनीकुमार नामक देवताओं ने उन्हें उसके पिता के गर्भ से बाहर निकाल लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.62: राजा मान्धाताकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 62: राजा मान्धाताकी महत्ता  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  7.62.3-4h 
धूमं दृष्ट्वागमत् सत्रं पृषदाज्यमवाप स:।
तं दृष्ट्वा युवनाश्वस्य जठरे सूनुतां गतम्॥ ३॥
गर्भाद्धि जह्रतुर्देवावश्विनौ भिषजां वरौ।
 
 
अनुवाद
दूर से धुआँ उठता देख, वे उसी दिशा में चले और एक यज्ञ-वेदी पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने घी मिश्रित जल पिया और एक पात्र में रखे मंत्रों का जाप किया। उस जल को युवनाश्व के गर्भ में पुत्र के रूप में परिवर्तित होते देख, श्रेष्ठ वैद्य अश्विनीकुमार नामक देवताओं ने उन्हें उसके पिता के गर्भ से बाहर निकाल लिया।
 
Seeing smoke rising from a distance, he went in that direction and reached a sacrificial altar. There he drank water mixed with ghee and consecrated mantras kept in a vessel. Seeing that water transforming into a son in Yuvanashwa's womb, the gods named Ashwinikumar, the best of physicians, took him out of his father's womb. 3 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)