Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.62.19-20: उसने अपनी कीर्ति चारों दिशाओं में फैलाई और पुण्यात्माओं के लोक में प्रवेश किया। हे श्वेतायु सृंजय! वह उपरोक्त चारों शुभ गुणों में तुमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ था और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक पुण्यात्मा था। जब वह भी मर गया, तो अन्यों का क्या होगा? अतः तुम यज्ञ और दान से वंचित अपने पुत्र के लिए शोक मत करो। ऐसा नारदजी ने कहा। | mahabharat अध्याय 7.62: राजा मान्धाताकी महत्ता । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गत: पुण्यकृतां लोकान् व्याप्य स्वयशसा दिश:।
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया॥ १९॥
पुत्रात् पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथा:।
अयज्वानमदाक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्॥ २०॥
अनुवाद
उसने अपनी कीर्ति चारों दिशाओं में फैलाई और पुण्यात्माओं के लोक में प्रवेश किया। हे श्वेतायु सृंजय! वह उपरोक्त चारों शुभ गुणों में तुमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ था और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक पुण्यात्मा था। जब वह भी मर गया, तो अन्यों का क्या होगा? अतः तुम यज्ञ और दान से वंचित अपने पुत्र के लिए शोक मत करो। ऐसा नारदजी ने कहा।
He spread his fame in all directions and entered the world of pious souls. O Shvaitya Srunjay! He was far superior to you in the four auspicious qualities mentioned above and was even more pious than your son. When he too died, what about others? Therefore, do not grieve for your son who is deprived of sacrifices and donations. This is what Naradji said.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये द्विषष्टितमोऽध्याय:॥ ६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें षोडशराजकीयोपाख्यानविषयक बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥