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mahabharat 7.62.16-17: वहाँ देवता, दानव, मनुष्य, यक्ष, गन्धर्व, नाग, पक्षी तथा वेद-वेदान्त के ज्ञाता ब्राह्मण और ऋषिगण तो थे, परन्तु वहाँ कोई ऐसा मनुष्य नहीं था जो विद्वान न हो ॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 7.62: राजा मान्धाताकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 62: राजा मान्धाताकी महत्ता  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  7.62.16-17 
देवासुरा नरा यक्षा गन्धर्वोरगपक्षिण:॥ १६॥
विप्रास्तत्रागताश्चासन् वेदवेदाङ्गपारगा:।
ब्राह्मणा ऋषयश्चापि नासंस्तत्राविपश्चित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ देवता, दानव, मनुष्य, यक्ष, गन्धर्व, नाग, पक्षी तथा वेद-वेदान्त के ज्ञाता ब्राह्मण और ऋषिगण तो थे, परन्तु वहाँ कोई ऐसा मनुष्य नहीं था जो विद्वान न हो ॥16-17॥
 
There were gods, demons, humans, Yakshas, ​​Gandharvas, snakes, birds and Brahmins and sages who were experts in the Vedas and Vedas. But there were no people there who were not scholars. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)