Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.62.15-16h: वहाँ खाने योग्य अन्न और पेय पदार्थों का भण्डार प्रचुर मात्रा में था। अन्न के ढेर पर्वतों के समान सुन्दर थे। उन पर्वतों के चारों ओर शहद और दूध की सुन्दर नदियाँ बह रही थीं। पर्वतों के चारों ओर घी के कुंड और दालों के कुएँ थे। वहाँ की अनेक नदियों में झाग के स्थान पर दही और जल के स्थान पर गुड़ का रस बह रहा था। | mahabharat अध्याय 7.62: राजा मान्धाताकी महत्ता । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ खाने योग्य अन्न और पेय पदार्थों का भण्डार प्रचुर मात्रा में था। अन्न के ढेर पर्वतों के समान सुन्दर थे। उन पर्वतों के चारों ओर शहद और दूध की सुन्दर नदियाँ बह रही थीं। पर्वतों के चारों ओर घी के कुंड और दालों के कुएँ थे। वहाँ की अनेक नदियों में झाग के स्थान पर दही और जल के स्थान पर गुड़ का रस बह रहा था।
There were many stored quantities of edible food grains and drinkable substances. The piles of food grains were as beautiful as mountains. Beautiful rivers of honey and milk surrounded those mountains. Around the mountains were filled with pools of ghee and wells of pulses. In many rivers there, instead of foam, curd flowed and in place of water, jaggery juice flowed. 15 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥