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mahabharat 7.62.10-11h: वह धार्मिक व्यक्ति, धैर्यवान, बहादुर, सत्यवादी और जीतेन्द्रिय थे। मानव मांधाता ने जनमेजय, सुधन्वा, गय, पुरु, बृहद्रथ, असित और नृग पर भी विजय प्राप्त की। 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.62: राजा मान्धाताकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 62: राजा मान्धाताकी महत्ता  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.62.10-11h 
धर्मात्मा धृतिमान् वीर: सत्यसंधो जितेन्द्रिय:।
जनमेजयं सुधन्वानं गयं पूरुं बृहद्रथम्॥ १०॥
असितं च नृगं चैव मान्धाता मनुजोऽजयत्।
 
 
अनुवाद
वह धार्मिक व्यक्ति, धैर्यवान, बहादुर, सत्यवादी और जीतेन्द्रिय थे। मानव मांधाता ने जनमेजय, सुधन्वा, गय, पुरु, बृहद्रथ, असित और नृग पर भी विजय प्राप्त की। 10 1/2॥
 
He was a religious person, patient, brave, truthful and a Jitendriya. Manav Mandhata also conquered Janamejaya, Sudhanva, Gaya, Puru, Brihadratha, Asita and Nriga. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)