Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.61.8-9h: उनके यहाँ आने वाले अतिथि 'रागखांडव' नामक मोदक और तरह-तरह के खाने-पीने की चीज़ें खाकर नशे में धुत होकर सड़कों पर लेट जाते थे। मेरे विचार से, उनके राज्य में यह एक अद्भुत बात थी, जिसकी तुलना अन्य राजाओं से नहीं की जा सकती थी। राजा दिलीप युद्ध के समय यदि पानी में भी चले जाते, तो उनके रथ के पहिये वहाँ नहीं धँसते थे। | mahabharat अध्याय 7.61: राजा दिलीपका उत्कर्ष । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनके यहाँ आने वाले अतिथि 'रागखांडव' नामक मोदक और तरह-तरह के खाने-पीने की चीज़ें खाकर नशे में धुत होकर सड़कों पर लेट जाते थे। मेरे विचार से, उनके राज्य में यह एक अद्भुत बात थी, जिसकी तुलना अन्य राजाओं से नहीं की जा सकती थी। राजा दिलीप युद्ध के समय यदि पानी में भी चले जाते, तो उनके रथ के पहिये वहाँ नहीं धँसते थे।
The guests who visited him used to lie down on the roads in a drunken state after eating the modak named 'Ragkhandav' and various eatables. In my opinion, this was a wonderful thing in his kingdom, which could not be compared with other kings. Even if King Dilip used to go into water during war, the wheels of his chariot would not sink there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥