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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 61: राजा दिलीपका उत्कर्ष  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.61.5 
रसानां चाभवन् कुल्या भक्ष्याणां चापि पर्वता:।
सहस्रव्यामा नृपते यूपाश्चासन् हिरण्मया:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रस की नदियाँ बह रही थीं और पर्वतों के समान अन्न के ढेर लगे हुए थे। राजन! उनके यज्ञ में हजारों विशाल स्वर्णमय यूप सुशोभित थे। 5॥
 
Rivers of juice flowed there and there were heaps of grains like mountains. Rajan! In his yagya, thousands of huge golden youpes were adorned. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)