vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 61: राजा दिलीपका उत्कर्ष
»
श्लोक 4
श्लोक
7.61.4
सहस्रं यत्र मातङ्गा गच्छन्ति पर्वतोपमा:।
सौवर्णं चाभवत् सर्वं सद: परमभास्वरम्॥ ४॥
अनुवाद
वहाँ हजारों पर्वतों के समान विशाल हाथी विचरण करते थे। राजा का दरबार-भवन सोने का बना था, जो सदैव दीप्तिमान रहता था।
Thousands of elephants as huge as mountains used to roam around there. The king's court hall was made of gold, which always remained resplendent. 4.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×