Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.60.13-14h: श्वेता सृंजय! भगीरथ उपरोक्त चारों गुणों में आपसे कहीं श्रेष्ठ थे। उनके गुण आपके पुत्र से कहीं अधिक थे। जब वे ही जीवित नहीं रह सके, तो अन्यों का क्या होगा? अतः आपको अपने उस पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए जो यज्ञ और दान से वंचित है। नारद जी ने भी राजा सृंजय से यही कहा था। 13 1/2। | mahabharat अध्याय 7.60: राजा भगीरथका चरित्र । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ १३॥
अयज्वानमदाक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्।
अनुवाद
श्वेता सृंजय! भगीरथ उपरोक्त चारों गुणों में आपसे कहीं श्रेष्ठ थे। उनके गुण आपके पुत्र से कहीं अधिक थे। जब वे ही जीवित नहीं रह सके, तो अन्यों का क्या होगा? अतः आपको अपने उस पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए जो यज्ञ और दान से वंचित है। नारद जी ने भी राजा सृंजय से यही कहा था। 13 1/2।
Shvaitya Srinjaya! Bhagiratha was far superior to you in all the four aspects mentioned above. His virtues were much greater than your son's. When even he could not survive, what about others? Therefore, you should not grieve for your son who is deprived of performing yagyas and giving donations. Narada said the same thing to King Srinjaya. 13 1/2.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये षष्टितमोऽध्याय:॥ ६०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें षोडशराजकीयोपाख्यानविषयक साठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६०॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १७ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥