श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 59: भगवान् श्रीरामका चरित्र  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.59.23-24h 
चतुर्विधा: प्रजा राम: स्वर्गं नीत्वा दिवं गत:॥ २३॥
आत्मानं सम्प्रतिष्ठाप्य राजवंशमिहाष्टधा।
 
 
अनुवाद
फिर समय आने पर अपने और अपने भाइयों के अंशरूपी दो-दो पुत्रों द्वारा आठ प्रकार के वंशों की स्थापना करके चारों वर्णों के नागरिकों को अपने धाम भेज दिया और स्वयं भी शरीर सहित परमधाम को चले गए ॥23 1/2॥
 
Then, in due course of time, having established eight types of dynasties through two sons each who were the parts of himself and his brothers, he sent the citizens of all the four castes to his abode and then himself departed to the Supreme abode with his body. ॥23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)