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mahabharat 7.59.2-3h: वे अत्यंत तेजस्वी और असंख्य गुणों से युक्त थे। लक्ष्मण के बड़े भाई श्री राम, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं हुए, अपने पिता की आज्ञा से अपनी पत्नी सीता (और भाई लक्ष्मण) के साथ चौदह वर्ष तक वन में रहे।   |   mahabharat अध्याय 7.59: भगवान् श्रीरामका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 59: भगवान् श्रीरामका चरित्र  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  7.59.2-3h 
असंख्येया गुणा यस्मिन्नासन्नमिततेजसि।
यश्चतुर्दश वर्षाणि निदेशात् पितुरच्युत:॥ २॥
वने वनितया सार्धमवसल्लक्ष्मणाग्रज:।
 
 
अनुवाद
वे अत्यंत तेजस्वी और असंख्य गुणों से युक्त थे। लक्ष्मण के बड़े भाई श्री राम, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं हुए, अपने पिता की आज्ञा से अपनी पत्नी सीता (और भाई लक्ष्मण) के साथ चौदह वर्ष तक वन में रहे।
 
He was extremely radiant and had innumerable virtues. Lakshmana's elder brother Shri Ram, who never deviated from his dignity, lived in the forest with his wife Sita (and brother Lakshmana) for fourteen years on the orders of his father. 2 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)