श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 59: भगवान् श्रीरामका चरित्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.59.1 
नारद उवाच
रामं दाशरथिं चैव मृतं सृञ्जय शुश्रुम।
यं प्रजा अन्वमोदन्त पिता पुत्रानिवौरसान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं- संजय! मैंने सुना है कि दशरथपुत्र भगवान श्री राम भी यहीं से परमधाम को प्रस्थान कर गए थे। उनके राज्य में समस्त प्रजा सदैव सुखी रहती थी। जैसे पिता अपने पुत्रों का पालन-पोषण करता है, वैसे ही वे प्रेमपूर्वक समस्त प्रजा की रक्षा करते थे॥1॥
 
Naradji says- Sanjaya! I have heard that Lord Shri Ram, the son of Dasharatha, had also left for the Supreme Abode from here. All the subjects in his kingdom were always happy. Just like a father takes care of his own sons, in the same way he used to protect all the subjects with love.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)