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mahabharat 7.58.8-9h: यहाँ तक कि प्रजापति को भी अपनी सृष्टि में, भूत, वर्तमान या भविष्य में, कोई अन्य महान राजा नहीं मिला, जो शिबि की जिम्मेदारियों को संभाल सके।   |   mahabharat अध्याय 7.58: राजा शिबिके यज्ञ और दानकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 58: राजा शिबिके यज्ञ और दानकी महत्ता  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.58.8-9h 
नो यन्तारं धुरस्तस्य कञ्चिदन्यं प्रजापति:॥ ८॥
भूतं भव्यं भवन्तं वा नाध्यगच्छन्नरोत्तमम्।
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि प्रजापति को भी अपनी सृष्टि में, भूत, वर्तमान या भविष्य में, कोई अन्य महान राजा नहीं मिला, जो शिबि की जिम्मेदारियों को संभाल सके।
 
Even Prajapati did not find any other great king in his creation, past, present or future, who could handle the responsibilities of the Shibi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)