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mahabharat 7.58.3-4: उसने प्रचुर मात्रा में हवन सामग्री सहित अनेक प्रकार के यज्ञ किए थे। वह वीर और बुद्धिमान राजा, पर्याप्त धन पाकर, युद्ध में सभी राजतिलक करने वाले राजाओं की दृष्टि में एक सम्मानित योद्धा बन गया था। इस पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने के बाद, उसने अनेक अश्वमेध यज्ञ किए थे।   |   mahabharat अध्याय 7.58: राजा शिबिके यज्ञ और दानकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 58: राजा शिबिके यज्ञ और दानकी महत्ता  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  7.58.3-4 
तेन यज्ञैर्बहुविधैरिष्टं पर्याप्तदक्षिणै:।
स राजा वीर्यवान् धीमानवाप्य वसु पुष्कलम्॥ ३॥
सर्वमूर्धाभिषिक्तानां सम्मत: सोऽभवद् युधि।
अयजच्चाश्वमेधैर्यो विजित्य पृथिवीमिमाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उसने प्रचुर मात्रा में हवन सामग्री सहित अनेक प्रकार के यज्ञ किए थे। वह वीर और बुद्धिमान राजा, पर्याप्त धन पाकर, युद्ध में सभी राजतिलक करने वाले राजाओं की दृष्टि में एक सम्मानित योद्धा बन गया था। इस पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने के बाद, उसने अनेक अश्वमेध यज्ञ किए थे।
 
He had performed various types of sacrifices with abundant offerings. That valiant and intelligent king, having got sufficient wealth, had become a respectable warrior in the eyes of all the crowned kings in the war. After conquering this earth, he had performed many Ashwamedha sacrifices.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)