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mahabharat 7.58.2: राजा शिबिन ने हमेशा अपने प्रमुख शत्रुओं को मारकर अपने विरोधियों पर विजय प्राप्त की, जिससे पर्वत, द्वीप, समुद्र और वन सहित पृथ्वी उनके रथ की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।   |   mahabharat अध्याय 7.58: राजा शिबिके यज्ञ और दानकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.58.2 
साद्रिद्वीपार्णववनां रथघोषेण नादयन्।
स शिबिर्वै रिपून् नित्यं मुख्यान् निघ्नन् सपत्नजित्॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा शिबिन ने हमेशा अपने प्रमुख शत्रुओं को मारकर अपने विरोधियों पर विजय प्राप्त की, जिससे पर्वत, द्वीप, समुद्र और वन सहित पृथ्वी उनके रथ की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।
 
King Shibin always conquered his opponents by killing his major enemies, making the earth, including the mountains, islands, seas and forests, resonate with the rumbling of his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)