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mahabharat 7.57.4: सदैव परिश्रमी और क्रीड़ा में तत्पर रहने वाले अभिनेता, नर्तक और गंधर्व पक्षी के आकार के आरती के प्यालों से अपनी कला दिखाकर उपर्युक्त विद्वानों का मनोरंजन करते और उनका आनंद बढ़ाते रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.57: राजा पौरवके अद्भुत दानका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 57: राजा पौरवके अद्भुत दानका वृत्तान्त  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.57.4 
नटनर्तकगन्धर्वै: पूर्णकैर्वर्धमानकै:।
नित्योद्योगैश्च क्रीडद्भिस्तत्र स्म परिहर्षिता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सदैव परिश्रमी और क्रीड़ा में तत्पर रहने वाले अभिनेता, नर्तक और गंधर्व पक्षी के आकार के आरती के प्यालों से अपनी कला दिखाकर उपर्युक्त विद्वानों का मनोरंजन करते और उनका आनंद बढ़ाते रहते थे।
 
The actors, dancers and Gandharvas, who were always industrious and engaged in sports, kept on entertaining and increasing the joy of the above-mentioned scholars by showing their art with the aarti cups shaped like birds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)