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mahabharat 7.57.2: उस राजर्षि के अश्वमेध यज्ञ में भिन्न-भिन्न देशों से आए हुए विद्वानों की गणना नहीं की गई थी, जो वहाँ की विद्या, अक्षर (विभिन्न देशों की लिपियाँ) और यज्ञ विधि को जानते थे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.57: राजा पौरवके अद्भुत दानका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 57: राजा पौरवके अद्भुत दानका वृत्तान्त  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.57.2 
तस्याश्वमेधे राजर्षेर्देशाद्देशात् समीयुषाम्।
शिक्षाक्षरविधिज्ञानां नासीत् संख्या विपश्चिताम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस राजर्षि के अश्वमेध यज्ञ में भिन्न-भिन्न देशों से आए हुए विद्वानों की गणना नहीं की गई थी, जो वहाँ की विद्या, अक्षर (विभिन्न देशों की लिपियाँ) और यज्ञ विधि को जानते थे॥2॥
 
In the Ashvamedha Yagya of that Rajarshi, the scholars who came from different countries who knew the pedagogy, alphabets (scripts of different countries) and the Yagya method were not counted. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)