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mahabharat 7.57.12: संजय! राजा पौरव धर्म, ज्ञान, वैराग्य और धन- इन चारों में तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। हे श्वेता संजय! जब उनकी भी मृत्यु हो जाए, तब तुम्हें यज्ञ और दक्षिणा दिए बिना अपने पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए। नारदजी ने भी राजा संजय से यही बात कही। 12.   |   mahabharat अध्याय 7.57: राजा पौरवके अद्भुत दानका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 57: राजा पौरवके अद्भुत दानका वृत्तान्त  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.57.12 
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथा:।
अयज्वानमदाक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
संजय! राजा पौरव धर्म, ज्ञान, वैराग्य और धन- इन चारों में तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। हे श्वेता संजय! जब उनकी भी मृत्यु हो जाए, तब तुम्हें यज्ञ और दक्षिणा दिए बिना अपने पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए। नारदजी ने भी राजा संजय से यही बात कही। 12.
 
Sanjaya! King Paurava was superior to you in all the four aspects - Dharma, knowledge, detachment and wealth, and was more pious than your son. O Shvaitya Sanjaya! When he also died, then you should not mourn for your son without performing Yagya and offering Dakshina. Naradaji said the same thing to King Sanjaya. 12.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें षोडशराजकीयोपाख्यानविषयक सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)