Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.56.4-5: पृथ्वी को म्लेच्छों और तस्करों से मुक्त करके उसने उसका भोग किया और धर्मपूर्वक देवताओं की पूजा करके तथा अपने बाणों से शत्रुओं को जीतकर अपने गुणों से समस्त प्राणियों का मनोरंजन किया। उसके लिए बादलों ने बहुत वर्षों तक स्वर्ण वर्षा की। ॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 7.56: राजा सुहोत्रकी दानशीलता । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मेणाराधयन् देवान्
बाणै: शत्रूञ्जयंस्तथा।
सर्वाण्यपि च भूतानि
स्वगुणैरप्यरञ्जयत्॥ ४॥
यो भुक्त्वेमां वसुमतीं
म्लेच्छाटविकवर्जिताम्।
यस्मै ववर्ष पर्जन्यो
हिरण्यं परिवत्सरान्॥ ५॥
अनुवाद
पृथ्वी को म्लेच्छों और तस्करों से मुक्त करके उसने उसका भोग किया और धर्मपूर्वक देवताओं की पूजा करके तथा अपने बाणों से शत्रुओं को जीतकर अपने गुणों से समस्त प्राणियों का मनोरंजन किया। उसके लिए बादलों ने बहुत वर्षों तक स्वर्ण वर्षा की। ॥4-5॥
Having freed the earth from mlechha (crowds) and smugglers, he enjoyed it and by worshipping the gods through righteous conduct and by conquering the enemies with his arrows, he entertained all creatures with his virtues. For him, the clouds rained gold for many years. ॥4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥