Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.55.d3: नारदजी बोले- महाराज! आप अपना शोक त्याग दीजिए! हे बुद्धिमान राजा! आप अपनी चिंता त्याग दीजिए। प्रभु! चाहे कोई कितना ही शोक करे या शोक के कारण कितना ही मूर्छित हो जाए, मरे हुए व्यक्ति को जीवित नहीं किया जा सकता। | mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(नारद उवाच
त्यज शोकं महाराज वैक्लव्यं त्यज बुद्धिमन्।
न मृत: शोचतो जीवेन्मुह्यतो वा जनाधिप॥
अनुवाद
नारदजी बोले- महाराज! आप अपना शोक त्याग दीजिए! हे बुद्धिमान राजा! आप अपनी चिंता त्याग दीजिए। प्रभु! चाहे कोई कितना ही शोक करे या शोक के कारण कितना ही मूर्छित हो जाए, मरे हुए व्यक्ति को जीवित नहीं किया जा सकता।
Naradji said- Maharaj! Give up your grief! Wise king! Give up your anxiety. Lord! No matter how much one grieves or how much one faints due to grief, a dead person cannot be brought back to life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥