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mahabharat 7.55.8: वह आई और राजा के सामने झुकी। राजा ने उसे मनचाहा आशीर्वाद दिया और अपने पास खड़ी लड़की का उचित ढंग से स्वागत किया। 8.   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.55.8 
तयाभिवादित: कन्यामभ्यनन्दद् यथाविधि।
तत्सलिङ्गाभिराशीर्भिरिष्टाभिरभित: स्थिताम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह आई और राजा के सामने झुकी। राजा ने उसे मनचाहा आशीर्वाद दिया और अपने पास खड़ी लड़की का उचित ढंग से स्वागत किया। 8.
 
She came and bowed before the king. The king gave her the desired blessing and greeted the girl standing beside him in a proper manner. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)