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mahabharat 7.55.6: एक दिन वे दोनों महर्षि सृंजय से मिलने उनके घर आए। महर्षि ने विधिपूर्वक उनका पूजन किया और दोनों वहाँ सुखपूर्वक रहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.55.6 
तौ कदाचिद् गृहं तस्य प्रविष्टौ तद्दिदृक्षया।
विधिवच्चार्चितौ तेन प्रीतौ तत्रोषतु: सुखम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वे दोनों महर्षि सृंजय से मिलने उनके घर आए। महर्षि ने विधिपूर्वक उनका पूजन किया और दोनों वहाँ सुखपूर्वक रहने लगे।
 
One day both of them came to meet Maharshi Srinjaya at his home. He worshipped them according to the rituals and both of them started living there happily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)