Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.55.49-50: हे श्वेतायु सृंजय! धर्म, ज्ञान, वैराग्य और धन - इन चारों बातों में राजा मरुत आपसे श्रेष्ठ और आपके पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। आपके पुत्र ने न तो कोई यज्ञ किया था और न ही वह दानशील था। अतः आप उसकी चिन्ता न करें - ऐसा नारद जी ने राजा सृंजय से कहा। 49-50 | mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया॥ ४९॥
पुत्रात् पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथा:।
अयज्वानमदाक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्॥ ५०॥
अनुवाद
हे श्वेतायु सृंजय! धर्म, ज्ञान, वैराग्य और धन - इन चारों बातों में राजा मरुत आपसे श्रेष्ठ और आपके पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। आपके पुत्र ने न तो कोई यज्ञ किया था और न ही वह दानशील था। अतः आप उसकी चिन्ता न करें - ऐसा नारद जी ने राजा सृंजय से कहा। 49-50
O Shvaitya Srinjaya! In all these four things - Dharma, knowledge, detachment and wealth - King Marut was superior to you and was more pious than your son. Your son had neither performed any sacrifice nor was he generous. Therefore, do not worry about him - this is what Narada said to King Srinjaya. 49-50.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें षोडशराजकीयोपाख्यानविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर ५४ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥