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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.55.4 
कियन्त्यो दक्षिणा दत्ता: कैश्च दत्ता महात्मभि:।
राजर्षिभि: पुण्यकृद्भिस्तद् भवान् प्रब्रवीतु मे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल के किन-किन महान् एवं धर्मात्मा राजाओं ने यज्ञों में कितनी दक्षिणा दी थी? कृपया मुझे यह सब बताइए।
 
Which great and pious kings of the past gave how much dakshina in yagnas? Please tell me all this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)