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mahabharat 7.55.35-36h: युधिष्ठिर! शोक से रोते हुए और अचेत पड़े राजा संजय से नारद जी ने जो कहा, उसे सुनिए।   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.55.35-36h 
उवाच चैनं दु:खार्तं विलपन्तमचेतसम्॥ ३५॥
सृञ्जयं नारदोऽभ्येत्य तन्निबोध युधिष्ठिर।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! शोक से रोते हुए और अचेत पड़े राजा संजय से नारद जी ने जो कहा, उसे सुनिए।
 
Yudhishthira! Listen to what Narada told King Sanjaya who was crying and unconscious due to grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)