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mahabharat 7.55.3: अतः आप पुनः मेरा सौभाग्य बढ़ाइए और मुझे अपने सत्य वचनों द्वारा आश्वस्त कीजिए, जिनसे मुझे उन प्राचीन राजाओं के पुण्य कर्मों का ज्ञान हो जाता है॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.55.3 
भूय एव तु मां तथ्यैर्वचोभिरभिबृंहय।
राजर्षीणां पुराणानां समाश्वासय कर्मभि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अतः आप पुनः मेरा सौभाग्य बढ़ाइए और मुझे अपने सत्य वचनों द्वारा आश्वस्त कीजिए, जिनसे मुझे उन प्राचीन राजाओं के पुण्य कर्मों का ज्ञान हो जाता है॥3॥
 
Therefore, please once again enhance my good fortune and assure me by your true words which make me aware of the good deeds of those ancient kings. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)