Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.55.17: अतः इस कन्या पर पति के रूप में तुम्हारा कोई अधिकार नहीं है। इस अवस्था में भी तुमने मुझे शाप दिया है; अतः तुम भी मेरे बिना स्वर्ग नहीं जा सकोगे। ॥17॥ | mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनुत्पन्ने च कार्यार्थे मां त्वं व्याहृतवानसि।
तस्मात् त्वमपि न स्वर्गं गमिष्यसि मया विना॥ १७॥
अनुवाद
अतः इस कन्या पर पति के रूप में तुम्हारा कोई अधिकार नहीं है। इस अवस्था में भी तुमने मुझे शाप दिया है; अतः तुम भी मेरे बिना स्वर्ग नहीं जा सकोगे। ॥17॥
"So you have no right over this girl as her husband. Even in this condition you have cursed me; therefore you too will not be able to go to heaven without me." ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥