Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.55.13: तब संजय ने अत्यन्त प्रसन्न होकर नारद से कहा, ‘मैं इसे आपको दे देता हूँ।’ यह सुनकर पर्वत अत्यन्त क्रोधित हो गया और नारद से बोला।   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.55.13 
ददानीत्येव संहृष्ट: सृञ्जय: प्राह नारदम्।
पर्वतस्तु सुसंक्रुद्धो नारदं वाक्यमब्रवीत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब संजय ने अत्यन्त प्रसन्न होकर नारद से कहा, ‘मैं इसे आपको दे देता हूँ।’ यह सुनकर पर्वत अत्यन्त क्रोधित हो गया और नारद से बोला।
 
Then, being very pleased, Sanjaya said to Narada, 'I will give it to you.' On hearing this, the mountain became very angry and said to Narada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)