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mahabharat 7.55.11: पर्वत ऋषि से यह प्रश्न पूछकर राजा संजय ने कहा, 'हे प्रभु! यह मेरी पुत्री है, जो मुझसे वर प्राप्त करना चाहती है।'   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.55.11 
एवं ब्रुवाणं देवर्षिं नृपति: सृञ्जयोऽब्रवीत्।
ममेयं भगवन् कन्या मत्तो वरमभीप्सति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पर्वत ऋषि से यह प्रश्न पूछकर राजा संजय ने कहा, 'हे प्रभु! यह मेरी पुत्री है, जो मुझसे वर प्राप्त करना चाहती है।'
 
Having asked this question from the sage Parvat, King Sanjaya said, 'O Lord! This is my daughter, who wants to obtain a boon from me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)