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mahabharat 7.55.10: अरे! क्या यह सूर्य की चमक है, अग्निदेव की शिखा है, या श्री, हरि, कीर्ति, धृति, पुष्टि, सिद्धि या चन्द्रमा की चमक है? 10॥   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.55.10 
उताहो भा: स्विदर्कस्य ज्वलनस्य शिखा त्वियम्।
श्रीर्ह्री: कीर्तिर्धृति: पुष्टि: सिद्धिश्चन्द्रमस: प्रभा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अरे! क्या यह सूर्य की चमक है, अग्निदेव की शिखा है, या श्री, हरि, कीर्ति, धृति, पुष्टि, सिद्धि या चन्द्रमा की चमक है? 10॥
 
Oh! Is it the glow of the Sun or the crest of Agnidev or the glow of Shri, Hari, Kirti, Dhriti, Pushti, Siddhi or the Moon?' 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)