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mahabharat 7.55.1: संजय कहते हैं - हे राजन! मृत्यु की उत्पत्ति और उसके अद्वितीय कर्मों के विषय में सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर ने पुनः व्यासजी को प्रसन्न करके यह बात बताई॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 55: षोडशराजकीयोपाख्यानका आरम्भ, नारदजीकी कृपासे राजा सृंजयको पुत्रकी प्राप्ति, दस्युओंद्वारा उसका वध तथा पुत्रशोकसंतप्त सृंजयको नारदजीका मरुत्तका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.55.1 
सञ्जय उवाच
श्रुत्वा मृत्युसमुत्पत्तिं कर्माण्यनुपमानि च।
धर्मराज: पुनर्वाक्यं प्रसाद्यैनमथाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! मृत्यु की उत्पत्ति और उसके अद्वितीय कर्मों के विषय में सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर ने पुनः व्यासजी को प्रसन्न करके यह बात बताई॥1॥
 
Sanjaya says - O King! On hearing about the origin of death and its unique deeds, Dharmaraja Yudhishthira once again pleased Vyasa and told him this.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)