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mahabharat 7.54.8: आपकी अनुमति लेकर मैं उत्तम धेनुकाश्रम में जाऊँगा और वहाँ आपकी ही पूजा में तत्पर होकर घोर तपस्या करूँगा॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.54.8 
त्वया ह्युक्ता गमिष्यामि धेनुकाश्रममुत्तमम्।
तत्र तप्स्ये तपस्तीव्रं तवैवाराधने रता॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आपकी अनुमति लेकर मैं उत्तम धेनुकाश्रम में जाऊँगा और वहाँ आपकी ही पूजा में तत्पर होकर घोर तपस्या करूँगा॥8॥
 
Taking your permission, I will go to the excellent Dhenukashram and there I will perform severe penance, being devoted to your worship only. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)