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mahabharat 7.54.47: वह महान्, प्रबल और भयंकर प्राणशक्ति, जो भयंकर शब्द करती है, केवल प्राणियों के शरीरों में ही प्रवेश करती है (चेतनात्मा में नहीं, क्योंकि) वह सर्वव्यापी, प्रचण्ड प्रभावशाली और अनन्त तेज से युक्त है। उसका कभी आवागमन नहीं होता ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.54.47 
वायुर्भीमो भीमनादो महौजा
भेत्ता देहान् प्राणिनां सर्वगोऽसौ।
नो वाऽऽवृतिं नैव वृत्तिं कदाचित्
प्राप्नोत्युग्रोऽनन्ततेजोविशिष्ट:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वह महान्, प्रबल और भयंकर प्राणशक्ति, जो भयंकर शब्द करती है, केवल प्राणियों के शरीरों में ही प्रवेश करती है (चेतनात्मा में नहीं, क्योंकि) वह सर्वव्यापी, प्रचण्ड प्रभावशाली और अनन्त तेज से युक्त है। उसका कभी आवागमन नहीं होता ॥47॥
 
The great, powerful and terrible life force that utters terrible words penetrates only the bodies of living beings (not the conscious soul, because) He is omnipresent, fiercely influential and full of infinite glory. He never has any traffic. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)