श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.54.46 
सर्वे देवा: प्राणिभि: प्रायणान्ते
गत्वा वृत्ता: संनिवृत्तास्तथैव।
एवं सर्वे प्राणिनस्तत्र गत्वा
वृत्ता देवा मर्त्यवद् राजसिंह॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
आयु के अंत में सभी इन्द्रियाँ जीवों के साथ परलोक जाती हैं और फिर उनके साथ ही इस लोक में लौट आती हैं। हे राजनश्रेष्ठ! इस प्रकार सभी जीव स्वर्गलोक में जाकर वहाँ देवताओं के रूप में निवास करते हैं। और कर्मरूपी देवता भी मनुष्यों के समान अपने भोगों का अंत होने पर इस लोक में लौट आते हैं। ॥46॥
 
At the end of their life, all the senses go to the other world with the living beings and then return to this world with them. O best of kings! In this way, all living beings go to the heaven and reside there in the form of gods. And the deities of action, like humans, return to this world after the end of their enjoyments. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)