Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.54.45: यही जीवों की मृत्यु है, यही रोगों की उत्पत्ति है। रोग का नाम रोग है, जिसके कारण प्राणी रोगी हो जाता है (उसका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है)। जीवन के अंत में सभी जीव इसी प्रकार मरते हैं। अतः राजन! व्यर्थ शोक मत करो। 45॥ | mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृत्युस्त्वेषां व्याधयस्तत्प्रसूता
व्याधी रोगो रुज्यते येन जन्तु:।
सर्वेषां च प्राणिनां प्रायणान्ते
तस्माच्छोकं मा कृथा निष्फलं त्वम्॥ ४५॥
अनुवाद
यही जीवों की मृत्यु है, यही रोगों की उत्पत्ति है। रोग का नाम रोग है, जिसके कारण प्राणी रोगी हो जाता है (उसका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है)। जीवन के अंत में सभी जीव इसी प्रकार मरते हैं। अतः राजन! व्यर्थ शोक मत करो। 45॥
This is the death of living beings, this is the origin of diseases. The name of disease is Rogka, due to which the creature becomes sick (its health is disturbed). At the end of life, all living beings die in a similar manner. So Rajan! Don't mourn in vain. 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥