Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.54.40: तुम्हारे आँसुओं की जो बूँदें मैंने अपने हाथों में ली थीं, वे जीवों के शरीरों में उत्पन्न रोग बनकर वृद्धों का नाश करेंगी। तुम्हें कोई पाप कर्म नहीं लगेगा; इसलिए तुम डरो मत ॥40॥ | mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यान्यश्रुबिन्दूनि करे ममासं-
स्ते व्याधय: प्राणिनामात्मजाता:।
ते मारयिष्यन्ति नरान् गतासून्
नाधर्मस्ते भविता मा स्म भैषी:॥ ४०॥
अनुवाद
तुम्हारे आँसुओं की जो बूँदें मैंने अपने हाथों में ली थीं, वे जीवों के शरीरों में उत्पन्न रोग बनकर वृद्धों का नाश करेंगी। तुम्हें कोई पाप कर्म नहीं लगेगा; इसलिए तुम डरो मत ॥40॥
The drops of your tears, which I took in my hands, will become diseases generated by the bodies of living beings and will destroy the aged beings. You will not be subjected to any evil deed; therefore do not be afraid. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥