ब्रह्मोवाच
तथा भविष्यते मृत्यो साधु संहर भो: प्रजा:।
अधर्मस्ते न भविता नापध्यास्याम्यहं शुभे॥ ३९॥
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - मृत्युओं! ऐसा ही हो। तुम उत्तम प्रकार से जीवों का संहार करते हो। शुभ! इससे तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा और मैं भी तुम्हारा बुरा नहीं मानूँगा। 39॥
Brahmaji said – Deaths! So be it. You kill the living beings in the best manner. Good luck! You will not commit any sin due to this and I too will not think ill of you. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)