श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.54.39 
ब्रह्मोवाच
तथा भविष्यते मृत्यो साधु संहर भो: प्रजा:।
अधर्मस्ते न भविता नापध्यास्याम्यहं शुभे॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - मृत्युओं! ऐसा ही हो। तुम उत्तम प्रकार से जीवों का संहार करते हो। शुभ! इससे तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा और मैं भी तुम्हारा बुरा नहीं मानूँगा। 39॥
 
Brahmaji said – Deaths! So be it. You kill the living beings in the best manner. Good luck! You will not commit any sin due to this and I too will not think ill of you. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)